Friday, 17 March 2017

अमावस्या व्रत विधान"
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~भगवान जम्भेशवर ने अपने शब्दों में वैसे तो अमावस्या , चौदस , पूर्णिमा व एकादशी आदि तिथियों का उल्लेख किया है , परंतु विशनोईयो के लिए मात्र एक अमावस्या का व्रत रखने का ही विधान रखा है ।
अमावस्या के दिन अन्त:करण की शुद्धि व विष्णु भगवान की प्रसत्रता के लिए उपवास करना चाहिए ।
अर्थात अमावस्या के दिन निराहार रहकर भगवान विष्णु की सेवा , हवन तथा जप आदि करना चाहिए ।
यहाँ यह ध्यान देने योग्य हे की अमावस्या का व्रत विशनोई मात्र के लिए रखना आवश्यक है ।
जबकि अमावस्या का व्रत करने वाले गिने-चुने लोग ही मिलते है ।।
अमावस्या एक पर्व दिन है । इस दिन शुभ कार्य करने पर कई गुना अधिक शुभ फल देता है । अत: अमावस्या को अधिक से अधिक जप , अनुष्ठान व्रत आदि का आचरण करना ही श्रेयस्कर है । विशनोई धर्म ( सम्प्रदाय ) एक उच्चतम आदर्श व नियमों को निभाने की शिक्षा देता है । इसमें सभी प्रकार का ढोंग , ब्रह्म दिखावा व जीव हिंसा सर्वथा वर्जित है ।
समय परिवर्तनशील है । अत: समय के प्रवाह में विशनोई धर्म के अनुयायी प्राय: भटक गये हैं ओर भटकते जा रहें हैं । ऐसी परिस्थिति मैं जिस विशनोई सज्जन की बुद्धि अपने वास्तविक धर्म पर अडिग है , वह सज्जन कल्याण मार्ग का पथिक है । उसके शुभ कार्य सराहनीय हैं ।
विशनोई सम्प्रदाय में अमावस्या का व्रत ( उपवास ) अपनी विशिष्ट रीति से होता है । परम्परा से ही अमावस्या के व्रत का पालन अमावस्या लगने से आधा घण्टा पूर्व भोजनकर प्रारंभ किया जाता है । अमावस्या उतरने कै आधा घंटा बाद भोजन कर व्रत उतार लिया जाता है । प्राय: रात्रि मे दस बजे के बाद भोजन नहीं करना चाहिए ।
अमावस्या चढने के बाद व उतरने से पहले शरीर के बाल कटवाना या काटना मना है ।
साबुन से स्रान या कपडे धोना भी अनुचित है । फलाहार या भोजन हाथ - पैर धोकर , बैठक करना ही श्रेयस्कर है । पाश्रात्य सभ्यता कै अनुसार जूते पहने हुए खडे-खडे भोजन करना अनुचित है । भोजन करतै समय कम बोलना चाहिए तथा अच्छे कार्यों का संकल्प करना चाहिए । भोजन या फलाहार करने के उपरांत हाथ-मुँह धोकर ही दूसरे कार्यों में लगना चाहिए ।
अमावस्या कै दिन दूध को जमाना तथा दही बिलौना परम्परा से वर्जित है । अमावस्या के दिन ऐसे व्यक्ति को अपने घर का दूध नहीं देना चाहिए । जिसकी दिनचर्या विशनोई धर्म के विपरीत है ।
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जाम्भोजी नाथोजी से कहते है :-
" सुने बहुत उपवास में , इनमें नहीं कुछ सार ।
व्रत अमावस को सही , कियो वेद साधार ।।
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अर्थात- जाम्भोजी के कथानुसार अमावस्या का व्रत वेद आधारित है ।
व्रत रखकर खाट पर सोना , मार्ग पर चलना , वाहन चलाना , खेती का कार्य करना , नाखून काटना , हल चलाना आदि भी वर्जित है ।
गाजर , शकरकंद , मूली आदि जमीकंद का सैवन भी अमावस्या व्रती को नही करना चाहिए ।
जितना हो सके -अधिक से अधिक
" विसंन विसंन " इस मंत्र का जप व्रत करने वाले के लिए कल्याणकारी होता है ।....
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नोट- अमावस्या के दिन जम्भवाणी दुआरा हवन करे , हवन मे घी देशी गाय का जो नियमपूर्वक बना हो...
.. जम्भशरणम ...